मध्य प्रदेश की ऋतुएं | Mp ke 3 Important Seasons Name in Hindi

मध्य प्रदेश की ऋतुएं मध्य प्रदेश में ऋतुऐं जलवायु के आधार पर तीन वर्गों में विभक्त किया गया है ग्रीष्म ऋतु,वर्षा ऋतु, शीत ऋतु,

तो आज हम यहां पर mp की ऋतुओं के बारे में विस्तार से जानेंगे।

अगर आप मध्यप्रदेश के किसी भी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं तो डेफिनिटली यह पोस्ट आपके लिए हेल्पफुल होने वाला है,

क्योंकि मध्यप्रदेश के सभी कॉम्पटीशन परीक्षाओं में मध्यप्रदेश की ऋतुओं से संबंधित प्रश्न जरूर पूंछे जाते हैं।

मध्यप्रदेश के 3 ऋतुओं के  नाम निम्लिखित है- 

  1. ग्रीष्म ऋतु
  2. वर्षा ऋतु और
  3. शीत ऋतु
मध्य प्रदेश की ऋतुएं
मध्य प्रदेश की ऋतुएं

मध्य प्रदेश की ऋतुएं | Seasons of Madhya Pradesh

1. ग्रीष्म ऋतु

मध्य प्रदेश में ग्रीष्म ऋतु का समय मार्च से लेकर 15 जून तक  होता है जिसमें सबसे ज्यादा तापमान मई माह में रहता है। जिसमें अधिकतम तापमान 45.5°C (सेल्शियस) तक पहुंच जाता है।

इस कारण आद्रता में कमी आ जाती है और बादल साफ होता है और धूल भरी चलती है

ग्रीष्म ऋतु में अत्यधिक गर्मी तो होता ही है साथ ही अत्यधिक धूप लगता है जिससे लू लगने की संभावना बहुत ज्यादा बढ़ जाती है।

2. वर्षा ऋतु

वर्षा ऋतु का प्रारंभ जून से ही शुरू हो जाता है जो कि अक्टूबर के मध्य तक वर्षा ऋतु रहता है गांव के लोग इस समय को चौमासा के नाम से भी जानते हैं क्योंकि,

क्योंकि वर्षा ऋतु जून ,जुलाई, अगस्त , सितंबर और अक्टूबर 4 महीने तक होता है जिस कारण गांव के लोग इसे चौमासा भी कहते ।

मध्यप्रदेश में सर्वाधिक वर्षा पचमढ़ी में होता है और सबसे कम वर्षा भिंड में होता है।

मध्य प्रदेश में वर्षा अरब सागर एवं बंगाल की खाड़ी से आने वाले मानसून के द्वारा वर्षा होती है मध्य प्रदेश के पूर्वी भाग में सबसे अधिक वर्षा होती है।

पचमढ़ी में सर्वाधिक वर्षा 199 सेंटीमीटर मध्य प्रदेश का और भिंड में 55 सेंटीमीटर सबसे कम वर्षा होती है

3. शीत ऋतु

शीत ऋतु का समय अक्टूबर से लेकर मार्च माह तक होता है इस दौरान दिसंबर और जनवरी में सर्वाधिक ठंडा होता है।

शीत ऋतु में कभी-कभी हल्की बारिश भी होती है और इस ऋतु में तापमान कम होता है साथ ही हल्की वायु चलती रहती है और प्रातः काल कोहरा देखने को मिलता है।

मध्यप्रदेश की ऋतुओं से संबंधित अन्य जानकारी पढें

~ मध्यप्रदेश में शीत ऋतु को सियाला नाम से भी जानते हैं और ग्रीष्म ऋतु को यूनाला के नाम से जानते हैं।

~ मध्यप्रदेश में सितम्बर ओर अक्टूबर के महीने में पड़ने वाली गर्मी को मध्यप्रदेश की दूसरा गर्मी ऋतु कहा जाता है।

~ मध्यप्रदेश में सबसे ज्यादा वर्षा माह जून से लेकर सितंबर तक होती है।

~ प्रदेश के उत्तरी भाग में टेम्परेचर अधिक है, एवं दक्षिणी पूर्व भाग में टेम्परेचर कम होता है।

~ मध्यप्रदेश में शीत ऋतु में (लौटने वाले मानसून) होने वाले वर्षा को मावठा कहा जाता है।

~ मध्यप्रदेश में सबसे ज्यादा ताप मार्च के महीने में रहता है।

मुझे लगता है कि अब आप मध्यप्रदेश की ऋतुओं के बारे में जान चुके होंगे और में चाहता हूं कि यह जानकारी आपके और दोस्तों को भी होनी चाहिए

क्योंकि यह मध्यप्रदेश के सभी परीक्षाओं की दृष्टि से अति महत्वपूर्ण टॉपिक है। अतः आप इस पोस्ट को फेसबुक, व्हाट्सएप आदि सोशल मीडिया पर  जरूर शेयर करें।

FAQ:

1. मध्य प्रदेश की ऋतुएं जलवायु के आधार पर कितने भागों में विभक्त किया गया है?

मध्य प्रदेश में ऋतुऐं जलवायु के आधार पर तीन वर्गों में विभक्त किया गया है 1. ग्रीष्म ऋतु, 2. वर्षा ऋतु, 3. शीत ऋतु,

2. मध्यप्रदेश में सबसे ज्यादा वर्षा किस माह में होती है

मध्यप्रदेश में सबसे ज्यादा वर्षा माह जून से लेकर सितंबर तक होती है।

3. मध्यप्रदेश में सबसे ज्यादा ताप किस महीने में रहता है।

मध्यप्रदेश में सबसे ज्यादा ताप मार्च के महीने में रहता है।

4. मध्यप्रदेश में शीत ऋतु को किस नाम से जाना जाता है?

मध्यप्रदेश में शीत ऋतु को सियाला नाम से जानते हैं

5. मध्यप्रदेश में शीत ऋतु को किस नाम से जाना जाता है?

Mp में ग्रीष्म ऋतु को यूनाला के नाम से जानते हैं।

6. मध्यप्रदेश में सर्वाधिक वर्षा कंहा होती है?

पचमढ़ी

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