1857 की क्रांति में गरुल सिंह का योगदान

1857 मैं जब क्रांति की ज्वाला प्रज्वलित हो रही थी तब मध्यप्रदेश के शहडोल जिले के सोहागपुर की रानी सुलोचना कुंवर के निकट रिश्तेदार और संरक्षक गरुल सिंह ने क्रांति का नेतृत्व किया।

गरुल सिंह ने अपने घर पर ही लगातार अपने सैनिकों से बैठक किया और उनको यह विश्वास दिलाया कि हमें हर हाल में अंग्रेजी सेना को देश से खदेड़ कर बाहर भगाना है तब ही जाकर हम स्वतंत्र हो सकेंगे इसी योजना को सफल बनाने के लिए गरुल सिंह ने अभियान योजना में जुट गए।

गरुल ने अपने पास की है 3 तोपों को साफ सफाई व सुधार कर अपने किले के दीवारों पर रख दिया

मंडला के डिप्टी कमिश्नर वण्डीगटन ने गरुल और बलभद्र सिंह को निर्देश किया कि वे जबलपुर में हाजिर हों और किले की दीवारों से तोपे हटा लें और एकत्र किया बारूद यहां भेज दें लेकिन गरुल सिंह ने यह आदेश को नहीं माना।

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