म.प्र. के संग्रहालय (Museum of MP)

इस पोस्ट के माध्यम से आज हम म.प्र. के संग्रहालय (Museum of MP) लेकर आए हैं जो कि आने वाले प्रतियोगी परीक्षाओं की दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण है ,

तो मुझे उम्मीद है कि यह जानकारी, Museum of MP आपको पसंद आएगी और साथ ही साथ आपके प्रतियोगी परीक्षा के लिए हेल्पफुल साबित भी होगा

म.प्र. के संग्रहालय (Museum of MP)

  ⇒ मध्यप्रदेश में पुरातत्व एवं संग्रहालय की स्थापना 1956 में हुई थी एवं वर्ष 1994 में राज्य अभिलेखागार का संविलियन भी इसमें किया गया।

⇒ पुरातत्व संपदा के लिए मध्यप्रदेश पूरे देश में सबसे आगे है प्रदेश में बिखरी पुरातत्व संपदा का सर्वेक्षण, चिन्हाकन, संरक्षण, प्रदर्शन एवं अनुरक्षण के साथ नए संग्रहालय की स्थापना कर जन सामान्य एवं शोधकर्ताओं में अपनी संस्कृति विरासत के प्रति जागृति पैदा करना विभाग का मुख्य उद्देश्य है । इस कार्य में संग्रहालय एवं स्मारक महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।

⇒ संग्रहालयों के अंतर्गत प्रदेश में राज्य स्तरीय संग्रहालय- भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर , धुबेला (छतरपुर) एवं रामवन (सतना) में है।

⇒ जिला स्तरीय संग्रहालय-  ओरछा, निवाड़ी, पन्ना, रीवा, शहडोल, मंडला, देवास, राजगढ़, विदिशा, होशंगाबाद, मंदसौर एवं धार में है।

⇒ इनके अलावा स्थानीय संग्रहालय – महेश्वर (खरगोन), आशापुरी (रायसेन) ,गंधर्वपुरी (देवास) ,पिछोर (ग्वालियर), चंदेरी (अशोकनगर) भानपुरा (मंदसौर) एवं कुंडेश्वर (टीकमगढ़) है.

इसके अलावा कुछ अन्य संग्रहालय निजी और शासकीय अनुदान द्वारा जिला पुरातत्व संग्रहालय संचालित हो रहे हैं।

इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय , Museum of MP

Museum of MP
Museum of MP

⇒ (IGRMS) इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय भोपाल में स्थित एक मानव विज्ञान संग्रहालय है।

⇒ इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय का भारत के  विशेष संदर्भ में तथा संस्कृति के विकास के इतिहास को प्रदर्शित करना है

⇒ यह संग्रहालय भारत की श्यामला हिल्स की पहाड़ियों पर 200 एकड़ के क्षेत्र में विस्तृत रूप से फैला है जहां पर 32 पारंपरिक एवं प्रागैतिहासिक चित्रित शैलाश्रय भी हैं

⇒ यह संग्रहालय भारत की ही नहीं अपितु एशिया में मानव जीवन को लेकर बनाया गया विशालतम संग्रहालय है

⇒ इस संग्रहालय में प्रमुख आदिवासी प्रजातियों में टोडा, बाराली, बाड़ा, कछरी, कोटा, सेवारा ,गदेव, कुटियाक, अगरिया, राजवद, कर्वी, भील की झोपड़ियां, बस्तर का रथ, मारिया लोगों का घोटुल, 110 फीट लकड़ी की बनी लकड़ी की नाव, शैल चित्र आदि अनेक प्रदर्शन इस संग्रहालय में हैं।

⇒ वर्ष 1985 में इस संग्रहालय को राष्ट्रीय मानव संग्रहालय के नाम से जाना जाता था इसके बाद

⇒ वर्ष 1993 में कैबिनेट के फैसले के माध्यम से इस संग्रहालय का नाम पूर्व प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी के नाम पर इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय किया गया।

⇒ यह संग्रहालय सबसे पहले 21 मार्च 1977 मैं नई दिल्ली के बहावलपुर हाउस में खोला गया था। किंतु

⇒ दिल्ली में पर्याप्त स्थान या जमीन ना होने के कारण इस संग्रहालय को भोपाल मध्य प्रदेश में शिफ्ट कर दिया गया।

राज्य आदिवासी संग्रहालय

⇒ यह संग्रहालय भी भोपाल के श्यामला हिल्स पहाड़ी पर स्थित है जो कि भोपाल में दूसरा संग्रहालय है

⇒ इसकी स्थापना वर्ष 1954 में छिंदवाड़ा में की गई थी किंतु किसी केंद्रीय स्थान में इसकी उपयोगिता को देखते हुए वर्ष 1965 में इसे छिंदवाड़ा से भोपाल शिफ्ट कर दिया गया।

⇒ इस संग्रहालय का उद्देश्य आदिवासियों के जनजीवन व उनकी संस्कृति के संरक्षण के उद्देश्य से इस संग्रहालय की स्थापना की गई।

⇒ यहां पर संगीत उपकरण, आभूषण, चित्रकारी, प्रस्तर उपकरण, कृषि उपकरण, शिकार करने के  हथियार – तीर कमान, मत्स्य आखेट के उपकरण वस्त्र हस्तशिल्प व उनके औषध तंत्र आदि संग्रहित किया जाता है

⇒ इस संग्रहालय में सहरिया ,भील ,गौड़, भरिया, कोरकु,  प्रधान, मवासी, बैगा, पनिका, खैरवार कोल, पाव भिलाला, बारेला ,पटेलिया, डामोर आदि जनजातियों के  कलाकृतियों को यहां पर संग्रहित किया गया है।

जनजातीय संग्रहालय

⇒ जनजातीय संग्रहालय भी भोपाल के श्यामला हिल्स पर स्थापित किया गया है

⇒ इस संग्रहालय में जनजातियों की इंद्रधनुषी संस्कृति की अनूठी विशेषताओं को प्रत्यक्ष रुप से प्रदर्शित किया गया है

⇒ मध्यप्रदेश में जनजातियों की आबादी अन्य प्रदेशों की अपेक्षा अधिक है

⇒ जनसंख्या की दृष्टि से वर्तमान मध्यप्रदेश में भील, गौड़, कोल, कोरकु, भरिया व  सहरिया आदि प्रमुख हैं।

म.प्र. के संग्रहालय (Museum of MP)
म.प्र. के संग्रहालय (Museum of MP)

पुरातत्व संग्रहालय भोपाल , Museum of MP

⇒ इस संग्रहालय की स्थापना 2 नवंबर 2005 को तत्कालीन मुख्यमंत्री श्री बाबूलाल गौर ने  12 करोड़ रुपए की लागत से निर्मित और 16 विशिष्ट वीथिकाओं से सुसज्जित भोपाल की श्यामला हिल्स पहाड़ी पर बने पुरातत्व संग्रहालय का मध्य प्रदेश के स्वर्ण  जयंती वर्ष पर लोकार्पण किया

⇒ इस संग्रहालय में पुराने सामाजिक जीवन, लोक शक्तियां, धार्मिक विश्वास और प्रतिमा निर्माण की कला शैलियां व्यवस्थित रुप से प्रदर्शित की गई हैं

⇒ रामायण ,महाभारत काल से लेकर राजपूत, पहाड़ी कांगड़ा, कोटा बूंदी और नाथद्वारा आदि के चित्र भी यहां पर प्रदर्शित किए गए हैं।

जिला पुरातत्व संग्रहालय, धार

⇒ आ जाएगा इस संग्रहालय की स्थापना वर्ष उन्नीस सौ दो में किया गया था।

⇒ यहां पर पाषाण प्रतिमाओं, अभिलेखों एवं कुछ प्रागैतिहासिक सामग्री का संग्रह है

⇒  यह मालवा क्षेत्र का सबसे पुराना संग्रहालय है जो कि इस क्षेत्र की कला संस्कृति का सच्चा प्रतिनिधित्व करता है।

⇒ यहां की प्रतिमाएं परमार कालीन है इनमें

⇒ ब्रह्मा, दामोदर, विष्णु त्रिविक्रम, इंद्र व अग्नि, लक्ष्मी नारायण, नर सिंह की प्रतिमाएं उल्लेखनीय हैं

⇒ सिक्कों में मुगल एवं सल्तनत कालीन सिक्के प्रमुख हैं

गुजरी महल संग्रहालय, ग्वालियर

⇒ इस संग्रहालय की स्थापना वर्ष 1922 में किया गया था

केंद्रीय संग्रहालय, इंदौर

⇒ वर्ष 1929 में स्थापित इंदौर संग्रहालय परमार काल के महत्वपूर्ण केंद्र हिंगलाजगढ़ की प्रतिमाओं के प्रदर्शन से न केवल देश वरन विदेशों में भी ख्याति प्राप्त कर चुका है।

⇒ इस संग्रहालय में रावणनुग्रह एवं चामुंडा प्रतिमाएं भारत महोत्सव अमेरिका में प्रदर्शित हो चुकी हैं।

⇒ यहां प्राचीन सिक्कों में छठ वीं सदी ईस्वी पूर्व से बीसवीं सदी ईसवी तक के सोने चांदी तांबे के सिक्कों के अतिरिक्त उत्खनन सामग्री में सिंधु सभ्यता के अवशेषों से लेकर प्रदेश के विभिन्न स्थानों पर हुए उत्खनन और जैसे- महेश्वर नावदाटोली आजाद नगर कायथा आगरा कसरावद डंगवाड़ा से प्राप्त सामग्रियां प्रदर्शित हैं।

जिला पुरातत्व संग्रहालय, विदिशा

⇒ इस संग्रहालय की स्थापना वर्ष 1940 में किया गया है

⇒ यहां पर पाषाण प्रतिमाओं का संग्रह है

⇒ इसके अलावा यहां पर वैष्णव, शैव ,शक्ति संप्रदायों की प्रतिमाओं के अतिरिक्त जैन प्रतिमाएं भी उल्लेखनीय हैं

महाराजा छत्रसाल संग्रहालय, धुबेला (छतरपुर)

⇒ इस संग्रहालय को पंडित जवाहरलाल नेहरू द्वारा वर्ष 1955 में लोकार्पण किया गया

⇒ यहां पर योगिनी प्रतिमाओं का अनूठा संग्रह है इसके अलावा पेंटिंग्स अस्त्र-शस्त्र शिलालेख एवं जैन प्रतिमाओं का संकलन एवं प्रदर्शन किया है

रानी दुर्गावती संग्रहालय ,जबलपुर

⇒ इस संग्रहालय की स्थापना वर्ष 1976 में किया गया

⇒ यहां पर कलचुरी कला का ब्राह्मण एवं जैन धर्म की प्रतिमाओं का संग्रह है

⇒ इसके अलावा यहां पर शिलालेख, ताम्रपत्र लेख, सोने, चांदी, तांबे के सिक्के एवं ककरहटा उत्खनन की वस्तुएं भी प्रदर्शित की गई हैं।

जिला पुरातत्व संग्रहालय, राजगढ़

⇒ इस संग्रहालय की स्थापना वर्ष 1976 में हुआ है यहां पर विशिष्ट कलाकृतियों को एकत्रित कर प्रदर्शित किया गया है

तुलसी संग्रहालय, रामवन (सतना)

⇒ इस संग्रहालय की स्थापना वर्ष 1978 में किया गया है

⇒ रामायण कला संग्रहालय (साकेत) ओरछा लोकार्पण 17 अप्रैल 2005 को किया गया

⇒ रामवन संग्रहालय भरहुत के पूरावशेषों के संकलन में देश में तीसरा स्थान रखता है ।

जिला पुरातत्व संग्रहालय,मंडला

⇒ इस संग्रहालय की स्थापना वर्ष 1979 में मंडला में किया गया

⇒ यहां पर मुख्य रूप से पाषाण प्रतिमाओं के संकलन के अतिरिक्त जीवाश्म का सुंदर संग्रह है

⇒ यहां पर लगभग 175 जीवाश्म प्रदर्शित की गई हैं

⇒ इस संग्रहालय में हस्तलिखित ग्रंथ सिक्के व मृण्यम प्रतिमाएं भी संग्रहालय में संग्रहित हैं।

जिला पुरातत्व संग्रहालय, नर्मदापुरम (होशंगाबाद)

⇒ इस संग्रहालय की स्थापना वर्ष 1984 मैं होशंगाबाद में हुआ

⇒ यहां पर मुक्ता परमार कालीन वैष्णव सेव जैन प्रतिमाएं संग्रहित किया गया है

⇒ इसके अलावा होशंगाबाद जिले के खेड़ीनेमा में वर्ष 1994 में हुए उत्खनन की पूरा वस्तुएं सामग्री हाथी दांत के जीवाश्म है।

जिला पुरातत्व संग्रहालय, पन्ना, (Museum of MP)

⇒ वर्ष 1988 में इस संग्रहालय की स्थापना की गई

⇒ इस संग्रहालय में गुप्त चंदेल एवं कलचुरी काल की पाषाण प्रतिमाएं प्रदर्शित हैं

⇒ और कुछ चांदी एवं तांबे के सिक्कों का भी संकलन है

जिला पुरातत्व संग्रहालय, देवास

⇒ इस संग्रहालय की स्थापना वर्ष 1988 में देवास में किया गया

जहांगीर महल संग्रहालय, ओरछा (टीकमगढ़)

⇒ इस संग्रहालय की स्थापना वर्ष 1990 में किया गया

⇒ इस संग्रहालय में स्थानीय एवं आसपास की पाषाण प्रतिमाएं सती स्तंभों शिलालेखों आदि के संग्रह को सुरुचिपूर्ण ढंग से प्रदर्शित किया गया है।

यशोधर्मन संग्रहालय, मंदसौर

⇒ इस संग्रहालय की स्थापना वर्ष 1982 83 में हुआ और इस संग्रहालय का लोकार्पण वर्ष 1997 में हुआ।

⇒ इस संग्रहालय में जिले के कई स्थानों से प्राप्त शेव, वैष्णव, देवी, जैन संप्रदाय से संबंधित प्रतिमाओं को प्रदर्शित किया गया है

स्थानीय संग्रहालय, गंधर्वपुरी (देवास)

⇒ गंधर्वपुरी संग्रहालय की स्थापना वर्ष 1964 में हुआ

⇒ इस संग्रहालय में पाषाण  प्रतिमाओं का संकलन है जो परमार कालीन शैव,वैष्णव, देवी एवं जैन धर्म से तालुकात रखता है।

स्थानीय संग्रहालय, आशापुरी (रायसेन)

⇒ यह संग्रहालय वर्ष 1965 से 66 में स्थापित किया गया है

⇒ इस संग्रहालय में आशापुरी ग्राम के कई स्थानों से संग्रहित प्रतिमा का सुंदर संग्रह है

स्थानीय संग्रहालय, भानपुरा (मंदसौर)

⇒ वर्ष 1958 59 में स्थापित पश्चिमी मालवा में स्थित भानपुरा संग्रहालय यशवंतराव होलकर प्रथम की छतरी परिसर में है

⇒ यहां भानपुरा व आसपास के कई क्षेत्र जैसे गांधी सागर के डूब क्षेत्र एवं हिंगलाजगढ़ की कलाकृतियों का अनूठा संग्रह है जो परमार कालीन मूर्तियों के उत्कृष्ट उदाहरण है

स्थानीय संग्रहालय, कुंडेश्वर (टीकमगढ़)

⇒ कुंडेश्वर संग्रहालय में लगभग 130 पाषाण प्रतिमाओं का संग्रह है और यह माना जाता है कि यह प्रतिमाएं छठ वी सदी ईस्वी से 14 से 15 वीं सदी ईस्वी की है

स्थानीय संग्रहालय, चंदेरी (अशोकनगर)

⇒ इस संग्रहालय में 1991 पहचान प्रतिमाओं का सुंदर संग्रह है

⇒ यह प्रतिमा स्थानीय रूप से संकलित तथा क्षेत्रीय कला का समुचित प्रतिनिधित्व करती है

देवी अहिल्याबाई संग्रहालय, महेश्वर (खरगोन)

⇒ इस संग्रहालय की स्थापना वर्ष 1974 में हुआ और इसका लोकार्पण अगस्त 1998 में हुआ

⇒ यहां पर जैन प्रतिमाओं के अलावा उत्खनन सामग्रियों व क्षेत्र के प्रमुख स्मारकों तथा देवी अहिल्या से जुड़े स्थलों के छायाचित्र को प्रदर्शित करते हुए होलकर शासकों के अस्त्र-शस्त्र को भी प्रदर्शित किया गया है।

⇒ इस संग्रहालय के संग्रह में शैव वैष्णव जैन प्रतिमाओं का भी संग्रह है

स्थानीय संग्रहालय, पिछोर (ग्वालियर)

⇒ यह संग्रहालय की स्थापना वर्ष 1977 में हुआ

⇒ इस संग्रहालय में क्षेत्र की पाषाण प्रतिमाओं का सुंदर संग्रह किया गया है जो क्षेत्रीय कला का प्रदर्शन करती है

स्वाधीनता संग्रहालय (Museum of MP)

⇒ मध्य प्रदेश की राजधानी स्वतंत्रता संग्राम पर केंद्रित इस तरह का अनूठा संग्रहालय स्थापित किया गया है ।

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ताकि उन्हें भी मध्य प्रदेश के संग्रहालय से संबंधित जानकारी आसानी से मिल सके।

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