राजा बख्तावर सिंह | Raja Bakhtawar Singh

हल्लो दोस्तों आज हम इस आर्टिकल में राजा बख्तावर सिंह (Raja Bakhtawar Singh) के बारे में जानेंगे अगर आप मध्य प्रदेश के किसी भी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं तो निश्चित रूप से यह जानकारी आपके लिए हेल्पफुल होने वाला है

राजा बख्तावर सिंह | Raja Bakhtawar Singh

Raja Bakhtawar Singh
Raja Bakhtawar Singh

बख्तावर सिंह मालवा के शासक (अमझेरा) थे जिन्होंने 1857 की क्रांति में अंग्रेजो के खिलाफ जमकर लोहा लिया।

बख्तावर सिंह मालवा के प्रथम शासक थे जिन्होंने कंपनी के शासन का अंत करने का बीड़ा उठाया और 1857 को अमझेरा का वकील चिमन रास व्यास भोपाल एजेंसी से दोपहर 4 बजे रवाना हुए 3 जुलाई 1857 को सुबह अमझेरा का दीवान गुलाब राय एक सशस्त्र टुकड़ी के साथ भोपाल आ पहुंचे।

दोनों टुकड़ियों ने मिंकर कंपनी के कर्मचारियों को बंधक बना लिया और सभी शासकीय रिकॉर्ड निकाल लिए एवं कुछ रिकार्डों को फाड़ भी दिये कुछ रिकार्ड जला दिए।

ब्रिटिश झंडे को भी फाड़ कर एजेंसी की दीवाल से हटा दिया गया कैप्टन हचिंसन और उसके साथियों का भोपाल से लगभग 17 मील की दूरी तक पीछा किया गया इसका नेतृत्व अमझेरा के एक नायक मोहनलाल द्वारा किया गया था लौटने के बाद घुड़ सवारों ने भोपाल के पोस्ट ऑफिस दवाखाने तथा एजेंसी को लूटा और सारा सामान हाथी एवं बैल गाड़ियों में रखकर अमझेरा ले गए।

11 जुलाई को कैप्टन हचिंसन होलकर की सेना के कमांडर बख्शी खुमान सिंह के साथ भोपाल लौट गया और कैप्टन हंगरफोर्ड के सुझाव पर स्पष्टीकरण मांगा और लौट गया सारा साजो सामान लौटाने का आग्रह किया

राजा ने यह कह कर टाल दिया कि उसके आदेशों को अनदेखा कर दीवान गुलाब राय चीफ सेक्रेटरी वीर उल्लाह खान तथा वकील चिमणराव व्यास ने लूटपाट मचाई और एजेंसी की संपत्ति को नष्ट कर दिया परंतु बख्शी खुमान सिंह के दबाव के कारण राजा को इन्हें पोलिटिकल एजेंट के सुपुर्द करने को बाध्य होना पड़ा

घर का किला अपने अधिकार में लेने के पश्चात कर्नल ड्यूरिंग ने कैप्टन हचिंसन के नेतृत्व में सेना की एक टुकड़ी भेजी जिसका काम अमझेरा के विद्रोहियों का दमन करना तथा लाल गढ़ के किले पर अधिकार स्थापित करना था

लालगढ़ का किला अमझेरा से 7 मील में दक्षिण-पश्चिम में स्थित था तथा अमझेरा से वहां पहुंचने का रास्ता अत्यंत कठिन था बड़ी मुश्किल से ब्रिटिश सेना पहुंचने की पूर्व ही अमझेरा के विद्रोही घने जंगलों की ओर प्रस्थान कर चुके थे।

किले में केवल 20 व्यक्ति रह गए थे जिन्होंने समर्पण कर दिया ब्रिटिश सेना ने काफी हद तक किले को नष्ट कर दिया परंतु उन्हें कोई खजाना हासिल नहीं हुआ

आखिर में राजा बख्तावर सिंह को अपने ही सहयोगियों के विश्वासघात के कारण 11 नवंबर 1857 को लालगढ़ के किले के पास के जंगल में गिरफ्तार कर लिया गया

और बख्तावर सिंह को हैदराबाद कतीन्जेन्ट घुड़सवार सेना की टुकड़ी के संरक्षण में महू लाया गया और मुकदमा चलाने के बाद राजा बख्तावर सिंह को इंदौर में 10 फरवरी 1858 को फांसी दे दी गई।

FAQ:-

बख्तावर सिंह को कहां फांसी दी गई

इंदौर मैं

बख्तावर सिंह को फांसी कब दी गई

10 फरवरी 181

बख्तावर सिंह को कब गिरफ्तार किया गया

11 नवंबर 1857 को लालगढ़ के किले के पास के जंगल से

बख्तावर सिंह कहां के शासक थे

धार जिला के अमझेरा कस्बे (मालवा क्षेत्र के शासक थे)

मुझे उम्मीद है कि आपको राजा बख्तावर सिंह (Raja Bakhtawar Singh) के बारे में जानकारी प्राप्त हुआ होगा,

ऐसे ही मध्य प्रदेश से संबंधित सामान्य ज्ञान पाने के लिए सब्सक्राइब करें और इस पोस्ट को अधिक से अधिक छात्रों तक शेयर कीजिए

We provide insights on diverse topics including Education, MP GK, Government Schemes, Hindi Grammar, Internet Tips and more. Visit our website for valuable information delivered in your favorite language – Hindi. Join us to stay informed and entertained.

Sharing Is Caring:

Leave a Comment