तात्या टोपे – Tatya Tope (रामचंद्र पांडुरंग)

हेलो फ्रेंड्स आज हम Tatya Tope के बारे में जानेंगे तात्या टोपे का संबंध अट्ठारह सौ सत्तावन (1857) की क्रांति से है,

अगर आप मध्य प्रदेश के किसी भी प्रतियोगी परीक्षा जैसे- एमपीपीएससी पुलिस पटवारी टीचर या शिक्षक आदि की तैयारी कर रहे हैं तो तात्या टोपे के बारे में एक प्रश्न पूछा जा सकता है इसी को ध्यान में रखते हुए हमने तात्या टोपे के बारे में यह महत्वपूर्ण जानकारी आपके लिए लेकर आए हैं तो इस पोस्ट को पूरा पढ़ें ।

तात्या टोपे – Tatya Tope

✔  तात्या टोपे एक वीर सेनानी था जिसका संबंध 1857 की क्रांति से है इनकी आरंभिक निष्ठा पेशवा परिवार के प्रति थी।

✔  पेशवा की तरफ से तात्या टोपे ने सेनाओं का नेतृत्व किया था

✔  तात्या टोपे का जन्म 1814 में महाराष्ट्र के पटौदा जिले के गांव येवला में हुआ था।

✔  तात्या टोपे के पिता का नाम पांडुरंग राव भट्ट था जो कि अपने पिता के सबसे बड़े संतान तात्या टोपे थे

✔  तात्या टोपे का रियल नाम रामचंद्र पांडुरंग था और उनके छोटे भाई का नाम गंगाधर था।

✔  जो कि उनके छोटे भाई गंगाधर, तात्या कह कर पुकारते थे जिस कारण रामचंद्र पांडुरंग से तात्या नाम पढ़ा गया।

✔  मराठा के शासक बाजीराव ने तात्या से प्रसन्न होकर उन्हें रत्न से युक्त टोपी उपहार स्वरूप दी थी।

✔  यह टोपी को जब तात्या अपने सिर पर पहने तो उन्हें बाजीराव ने टोपी कहकर पुकारने लगे तब से एक नया नाम टोपे भी उनके नाम पर जुड़ गया जो पूरा नाम होता है तात्या टोपे तो इस तरह से रामचंद्र पांडुरंग का नाम तात्या टोपे पड़ा

✔  तात्या टोपे की माता का नाम रुकमा बाई था बाजीराव के यहां तात्या टोपे के पिता पांडुरंग भट्ट पुरोहित थे

✔  तात्या टोपे साहब से 10 वर्ष बड़े थे नाना साहब तात्या टोपे तथा मेरो पंथ की पुत्री मनु का पालन पोषण एक साथ ही हुआ है।

✔  भारत में अंग्रेजी शासन के खिलाफ क्रांति करने के लिए नाना साहब तात्या टोपे और उनके कई साथी ने एक मजबूत योजना बनाई और इस क्रांति को सफल बनाने के लिए संगठन भी बनाया

✔  इस संगठन के सदस्यों ने अपनी पहचान छुपा कर या भेष बदलकर अंग्रेजों के स्थानों पर जाना शुरू कर दिया वहां यह सदस्य भारतीय सैनिकों को अंग्रेजों के विरुद्ध भड़काते थे।

✔  तात्या टोपे ने इस संगठन को इतनी सफलता के साथ चलाया की अंग्रेजी शासन को इस संगठन के बारे में भनक तक ना लगे

✔  तात्या टोपे ने एक नई क्रांतिकारी राज्य की स्थापना कर दी जिसका मुख्य केंद्र शिल्पी एवं जलालाबाद था

✔  तात्या टोपे ने यह संगठन गनिमी कावा के नियमों को अपनाते हुए संगठन बनाया

✔  कुछ दिनों बाद तात्या टोपे ने अंग्रेजों से लड़ाई कर कानपुर पर अधिकार कर लिया

✔  आखिर में अंग्रेजी शासन ने कूटनीति का सहारा लिया और राजा मानसिंह की मदद से तात्या टोपे को 7 अप्रैल 1859 को बंदी बना लिया

✔  तात्या टोपे पर 15 अप्रैल 1859 को शिवपुरी के सैनिक न्यायालय के आदेशानुसार 18 अप्रैल 1859 को सायं 7:00 बजे तात्या टोपे को मृत्युदंड दे दिया गया

FAQ-

तात्या टोपे (Tatya Tope) को फांसी कब दिया गया?

उत्तर- 18 अप्रैल 1859 को सायं 7:00 बजे तात्या टोपे को मृत्युदंड (फांसी) दे दिया गया.

तात्या टोपे का वास्तविक नाम क्या था?

उत्तर- तात्या टोपे का रियल या वास्तविक नाम रामचंद्र पांडुरंग राव येवलकर था और उनके छोटे भाई का नाम गंगाधर था।

तात्या टोपे के माता का नाम क्या था?

उत्तर- रुकमा बाई

तात्या टोपे का जन्म कब हुआ था?

उत्तर- तात्या टोपे का जन्म 1814 में महाराष्ट्र के पटौदा जिले के गांव येवला में हुआ था।

तात्या टोपे की समाधि कहां बनाई गई है?

उत्तर शिवपुरी में

मुझे उम्मीद है कि अब आप तात्या टोपे (Tatya Tope) के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी जान गए होंगे ऐसे ही मध्य प्रदेश से संबंधित सामान्य ज्ञान पाने के लिए सब्सक्राइब करें और हो सके तो इस पोस्ट को अपने दोस्तों को व्हाट्सएप फेसबुक के माध्यम से शेयर करें

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